bible eshu masih vachan यूसुफ का स्वयं को प्रकट करना

 

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यूसुफ का स्वयं को प्रकट करना

तब यह सब तुम सबके सामने जो उसके आसपास खड़े थे अपने को और रोक न सका और पुकार के कहा मेरे आस-पास से सब लोगों को बाहर कर दो भाइयों के सामने अपने को प्रगति करने की समय यूसुफ के संग और कोई ना रहा तब वह चिल्ला चिल्ला कर रोने लगा और मिश्रियों ने सुना और फिरौन के घर की लोगों को भी इसका समाचार मिला तब युसूफ अपने भाइयों से करने लगा मैं यीशु हूं क्या मेरा पिता अब तक जीवित है इसका उत्तर उसके भाई ना दे सके क्योंकि वह उसके सामने घबरा गए थे फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा मेरे निकट आओ यह सुनकर भी निकट गए फिर उसने कहा मैं तुम्हारा भाई यीशु हूं जिसको तुमने मिश्र आने वालों की हाथ बेच डाला था अब तुम लोगमत पछताओगे और तुमने जो मुझे यहां भेज डाला इससे उदास मत हो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिए मुझे तुम्हारे आगे भेज दिया है क्योंकि अब 2 वर्ष से इस देश में काल है और अब 5 वर्ष और ऐसे ही होंगे कि उनमें ना तो हल चलेगा और ना एन काटा जाएगा इसलिए परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसीलिए भेजो कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो और तुम्हारे प्राणों की बचाने से तुम्हारा वंश बड़े इस रीति अब मुझको यहां पर भेजने वाले तुम नहीं परमेश्वर ही ठहर और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा और उसकी सारी घर का स्वामी और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है अतः शीघ्र मेरे पिता की पास जाकर कहो तेरा पुत्र यीशु यह कहता है तेरा निवास गोसेन देश में होगा और तू बेटे वह तो भेड़ बकरियों गाय बैलों और अपने सब कुछ समेत मेरे निकट रहेगा और काल की जो 5 वर्ष और होंगे उनमें मैं वही तेरा पालन पोषण करूंगा ऐसा ना हो कितू और तेरा घराना वर्णन जितने तेरे हैं हुए भूखे मरे और तुम अपनी आंखों से देखते रहो और मेरा भाई विन्यामीन भी अपनी आंखों से देखा है कि जो हमसे बातें कर रहा है वही युसूफ है तुम मेरे सब वैभव का जो मिस्र में है और जो कुछ तुमने देखा है उसे सब का मेरे पिता से वर्णन करना और तुम तुरंत मेरे पिता को यहां दे आना तब वह अपने भाई विन्यामीन के गले से लिपटकर रोज और विन्यामीन भी उसके गले से लिपटकर रोय वह अपने सब भाइयों को भी चूम कर रोए और इसके पश्चात उसके भाई उससे बातें करने लगे

इस बात का समाचार की यीशु के भाई आए हैं फिरौन की भवन तक पहुंच गया और इससे फिरौन और उसके कर्मचारी परेशान हुई इसलिए फिरौन ने यूसुफ से कहा अपने भाइयों से कहा कि एक काम करो अपने पशुओं को लड़ कर कारण देश में चले जाओ और अपने पिता और अपने-अपने घर के लोगों को लेकर मेरे पास आओ और मिस्र देश में जो कुछ अच्छे से अच्छा है वह मैं तुम्हें दूंगा और तुम्हें उसे देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाने को मिलेंगे और तुझे आज मिला है तुम एक काम करो कि मिस्र देश से अपने बाल बच्चों और मिश्रियों के लिए गाड़ियां ले जाओ और अपने पिता को ले आओ और अपनी सामग्री का मुंह ना करो क्योंकि सारे मिस्र देश में जो कुछ अच्छे से अच्छा है वह तुम्हारा है

इसराइल के पुत्रों ने वैसा ही किया और यह सुख में फिरौन की आज्ञा के अनुसार उन्हें गाड़ियां दी और मार्ग की लिए भोजन सामग्री भी दी उनमें से एक-एक जन्म को उसने एक-एक जोड़ा वस्त्र भी दिया और दुनिया मौतके ₹300 के टुकड़े और पांच जोड़ वस्त्र दिए अपने पिता के पास उसने जो भेजा वह यह है अर्थात मिश्र की अच्छी वस्तुओं से लगे हुए 10 गधे और अन्य और रोटी और उसके पिता की मार्ग के लिए भोजन वस्तु से लदी हुई 10 गाड़ियां तब उसने अपने भाइयों को विदा किया और उन्हें चल दिए और उसने उनसे कहा मार्ग में कहीं झगड़ा ना करना मिश्र से चलकर उन्हें कनान देश में अपने पिता या खूब की पास पहुंचे और उससे यह कहा यूसुफ अब तक जीवित है और सारे दूसरे देश पर प्रभुता वही करता है पर उसने उनकी प्रतीति नवी और वह अपने आप में ना रहा तब उन्होंने अपने पिता या खूब से यूसुफ की सारी बातें जो उसने उनसे कही थी कहीं थी जब उसने उन गाड़ियों को देखा तो यीशु ने उसके लिए आने के लिए भेजी थी तब उसका चित्र स्थिर हो गया और इजरायल ने कहा बस मेरा पुत्र युसूफ अब तक जीवित है मैं अपनी मृत्यु से पहले जाकर उसको देखेगा

याकूब का सारे परिवार समेत मिश्र को जाना

तब इसराइल अपना सब कुछ लेकर बेशर्मब हो गया और वहां अपने पिता इश्क के परमेश्वर को बलिदान चढ़ाया तब परमेश्वर ने इसराइल से रात को दर्शन में कहा है या खूब है या खूब उसने कहा क्या आगया उसने कहा मैं परमेश्वर हूं तेरे पिता का परमेश्वर तू मिस्र में जाने से मत डर क्योंकि मैं तुझे वहां एक बड़ी जाति बनाऊंगा मैं तेरे संग संग मिस्र में चलता हूं और मैं तुझे वहां से सिर्फ निश्चय ले आऊंगा और यीशु अपने हाथ से तेरी आंखों को बंद करेगा तब याकूब बेपरवाह से चला और इजरायल के पुत्र अपने पिता याकूब और अपने बाल बच्चों और स्त्रियों को उन गाड़ियों परजो फिरौन ने उनकी ले आने को भेजी थी चढ़कर चल पड़े  हुए अपनी भीड़ बकरियां गए पर और कनान देश में अपने इकट्ठा किए हुए सारे धन को लेकर मिस्र में आए और याकूब अपने बेटे बेटियों पोते पोतियो अर्थात अपनी वंश घर को अपनी पसंद मिस्र में ले आया

 

याकूब के साथ जो इजरायली अर्थात उसकी बेटी पोते आदि मिश्र में आए उनके नाम दिए हैं क्या खूब का जेठ रूबेन था और रूबेन के पुत्र खानों पल्लूही स्त्रों और कमी द साइमन के पुत्र सैमुअल यामीन ओहद या की सोहर और एक पुरानी स्त्री से जन्म हुआ साहुल भी था लवी की पुत्रगैसों का हाथ और मरण थे यहूदी की एरर यूनान सेल प्रेस और जीरा नमक पुत्र हुए तो थे पर और और यूनान का नाम देश में मर गए थे और प्रेस के पुत्र हेसरों और अमूल थे इस सरकार के पुत्र तोला होगा योग और सिमरन थे जब लोन के पुत्र शरद अलोन और यह लल थे लिया के पुत्र जो याकूब से बदन राम में उत्पन्न हुए थे उनके बेटे होते यह ही थे और उनसे अधिक उसने उसके साथ एक बेटी देना वह भी जन्म दिया यहां तक तो याकूब की सब वंश वाले 35 प्राणी हुए

फिर बाद के पुत्र शन होगी सनी एस भवन एरिया आरोही और हरेली थी अशर के पुत्र यमुना ईश्वर विश्व और बड़ी आते और उनकी बहन से रही थी और बारिया के पुत्र बर और माल की एल थे जुल्का जिससे लवण ने अपनी बेटी लिया को दिया था उसके बेटे होते आदि यह ही थे और उसके द्वारा याकूब की 16 फरवरी उत्पन्न हुए फिर याकूब की पत्नी राहुल के पुत्र यीशु और दुनिया मीन थे और मिस्र देश में कौन के योजक होती पारा की बेटी अस से यूसुफ के पुत्र उत्पन्न हुए अर्थात मनुष्य और यह प्रेम और विनियमिल के पुत्र बेला बेकार एस्बेल गहरा नमन यही रोजसु प्रीमसु प्रीम और मिस्र देश में कौन के अजाक होती पारा की बेटी आशनाथ से यूसुफ के यह पुत्र उत्पन्न हुए अर्थात मनुष्य और एप्रेम और विनम्रं के पुत्र बेला बेकार एस्बेल गहरा नामक एक ही रोज भूमि और अर्थ थी राहुल के पुत्र जो याकूब से उत्पन्न हुए उनके यह ही पुत्र थे उसके यह सब बेटे होते 14 प्राणी हुई

फिर दान का पुत्र खुशाइम था ना पतली के पुत्र यह सेल गुनी शहर और जिले में थे बिल्हा जिसे लाहाबाद ने अपनी बेटी राहुल को दिया उसके बेटे पोते यही है उसके द्वारा याकूब की वश में 100 प्राणी हुए

याकूब के निज वंश के जो प्राणी मिस्र में आए हुए उसकी बहू को छोड़ शब्द मिलकर 66 प्राणी हुए और यूसुफ के पुत्र जो मिश्रा में उससे उत्पन्न हुए हुए दो प्राणी थी इस प्रकार याकूब के घराने के जो प्राणी मित्र में आए हुए सब मिलकर सत्र हुए 

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