याकूब और उसका परिवार मिस्र में

 

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याकूब और उसका परिवार मिस्र में

फिर उसने यहूदी को अपने आगे यूसुफ के पास भेज दिया कि वह उसको गोसेन का मार्ग दिखाएं और वह गोसेन देश में आए तब यह सुख अपना रथ और जुतबा कर अपने पिता इजराइल से भेंट करने के लिए गोसेन देश को गया और उसे भेंट करके उसके गले से लिपटा और बहुत देर तक उसकी गले से लिपटा हुआ रोता रहा तब इसराइल ने यूसुफ एफ से कहा मैं अब मरने से भी प्रसन्न हूं क्योंकि तुझे जीवित पाया और तेरी मुंह देख लिया तब यीशु ने अपने भाइयों से और अपने पिता के घराने से कहा मैं जाकर फिरौन को यह कहकर समाचार दूंगा मेरे भाई और मेरे पिता के सारे घराने के लोग जो कनाल देश में रहते थे वह मेरे पास आ गए हैं और वे लोग चरवाहे हैं क्योंकि वे पशुओं को पलते हैं इसलिए वह अपनी भेड़ बकरी गाय बैल और जो कुछ उनका है सब ले आए हैं जब फिरौन तुमको बुलाकर पूछे तुम्हारा उद्यम क्या है तब यह कहना मेरे पास लड़कपन से लेकर आज तक पशुओं को पालते आए हैं वरन हमारे पुरखा भी ऐसा ही करते थे इससे तुम को संदेश में रहने पाओगे क्योंकि सब चरवाहों से मिस्री लोग घृणा करते हैं

तब ही शुभ ने फिरौन के पास जाकर यह समाचार दिया मेरा पिता और मेरे भाई और उनकी भेड़ बकरियां गाय बैल और जो कुछ उनका है सब कनान देश से आ गया है और अभी तो भी गोसेंड देश में है फिर उसने अपने भाइयों में से पांच जान लेकर फिरौन के सामने खड़े कर दिए फिरों ने उसके भाई से पूछा तुम्हारा उत्तम क्या है उन्होंने प्रेम से कहा तेरे दास चरवाहे हैं और हमारी पुरखा भी ऐसे ही रहे फिर उन्होंने फिरौन से कहा हम इस देश में परदेसी की भांति रहने के लिए आए हैं क्योंकि कनान देश में भारी काल होने के कारण तेरे दसों को भेड़ बकरियों के लिए चार ना रहा इसलिए अपने दसों को गोसेन देश में रहने की आज्ञा दें तब फिरौन ने यूसुफ से कहा तेरा पिता और तेरे भाई तेरे पास आ गए हैं और मिस्र देश तेरे सामने पड़ा है इस देश का जो सबसे अच्छा भाग हो उसमें अपने पिता और भाइयों को वास द अर्थात भी गोसेन ही देश में रहे और यदि तू जानता हो कि उनमें से परिश्रमी पुरुष है तो उन्हें मेरे पशुओं के अधिकारी ठहरा देतब यूसुफ ने अपने पिता याकूब को लेकर फिरौन के सम्मुख खड़ा किया और भी याकूब ने फिरौन को आशीर्वाद दिया तब फिरौन ने याकूब से पूछा तेरी आयु कितने दिन की हुई है याकूब ने फिरौन से कहा मैं 130 वर्ष परदेसी होकर अपना जीवन बिता चुका हूं मेरे जीवन के दिन थोड़ी और दुख से भरे हुए भी थे और मेरे बाप दादी परदेसी होकर जितने दिन तक जीवित रहे उतने दिन तक मैं अभी नहीं हुआ और याकूब फिरौन को आशीर्वाद देकर उसके समझ से चला गया तब यूसुफ ने अपने पिता और भाइयों को बस दिया और फिरौन की आज्ञा के अनुसार मिस्र देश के अच्छे से अच्छा भाग में अर्थात राम शेष नमक प्रदेश में भूमि देकर उनको सौंप दिया और यूसुफ अपने पिता का और अपने भाइयों का और पिता के सारे घराने का एक-एक के बाल बच्चों की गिनती के अनुसार भोजन दिल दिल कर उनका पालन पोषण करने लगा

हलाल और यीशु का प्रबंध

एकअल उसे समय सारे देश में खाने को कुछ ना रहा क्योंकि काल बहुत भारी था और काल के करण मिश्रा और कानन दोनों देश त्रस्त हो गए और जितना रुपया मिश्र और कनान देश में था सबको यीशु ने उसे अन्य के बदले जो उनके निवासी मूल लेते थे इकट्ठा करके फिरौन के भवन में पहुंचा दिया जब मिश्र और कनान देश का रुपया समाप्त हो गया तब सब मिश्री यूसुफ के पास आकर कहने लगी हम भोजन वस्तु दे क्या हम रुपए के न रहने से तेरे रहते हुए मर जाए यूसुफ ने कहा यदि रुपए ना हो तो अपने पशु दे दो और मैं उनके बदले तुम्हें खाने को दूंगा तब भी अपने पशु यीशु के पास ले आए और यूसुफ उनका घोर भेड़ बकरियों गाय बैलों और गड्ढों के बदले खाने को देने लगा उसे वर्ष में वह सब जाति के पशुओं के बदले भोज देकर उनका पालन पोषण करता रहा वह वर्ष तो यूं कट गया तब अगली वर्ष में उन्होंने उसके पास आकर कहा हम अपने प्रभु से यह बात छुपा ना रखेंगे कि हमारा रुपया समाप्त हो गया और हमारे सब प्रकार के पशु हमारे पशु के पासआ चुके हैं इसलिए अब हमारे प्रभु के सामने हमारे शरीर और भूमि छोड़कर और कुछ नहीं रहा

हम तेरे देखते हैं क्यों मरे और हमारी भूमि क्यों उजाड़ जाए हमको और हमारी भूमि को भोजन वास्तु के बदले माल ले कि हम अपनी भूमि समेत फी फिरौन के दास और हमको बी डी की हम मरने ना पाए वर्णन जीवित रहे और भूमि ना उजड़े

 

तब यीशु अपने मित्र की सारी भूमि को फिरौन के लिए माल लिया क्योंकि उसे भयंकर अकाल के पढ़ने से मिश्रियों को अपना अपना खेत बेच डालना पड़ा इस प्रकार सारी भूमि फिरौन की हो गई और एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक सारी विश्व देश में जो प्रजा रहती थी उसका उसने नगरों में लाकर बस दिया पर याजकों की भूमि उसने ना मोल ली क्यों किया जख्मों के लिए फिरौन की ओर से नित्य भोजन का बंदोबस्त था और नित्य जो भोजन फिरौन उनको देता था वही वह कहते थे इस कारण उनको अपनी भूमि भेजनी ना पड़ी तब यीशु अपने प्रजा के लोगों से कहा सुनो मैं आज के दिन तुमको और तुम्हारी भूमि को भी फिरौन के लिए माल लिया है देखो तुम्हारे लिए यहां बी है इस भूमि में वह और जो कुछ मुझे उसका पांच मांस फिरौन को देना बाकी चार अंश तुम्हारे रहेंगे कि तुम उसे अपने खेतों में वह और अपने-अपने बाल बच्चों और घर की अन्य लोगों समेत खाया करो उन्होंने कहा तूने हमको बचा लिया है हमारे प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि हम पर बनी रहे और हम फिरौन के दास होकर रहेंगे इस प्रकार यूसुफ ने मिस्र की भूमि के विषय में ऐसा नियम ठहराया जो आज के दिन तक चला आता है की पांच मास फिरौन को मिला करें केवल याजकों ही की भूमि फिरौन की नहीं हुई

 

याकूब की अंतिम इच्छा

इजरायली मिश्र के गोसेन प्रदेश में रहने लगे और वहां की भूमि उनके वश में थी और वह फूल फल और अत्यंत बढ़ गए मिश्रा देश में या खूब 17 वर्ष जीवित रहा इस प्रकार याकूब की सारी आयु 147 वर्ष की हुई जब इजरायल की करने का दिन निकट आ गया तब उसने अपने पुत्र यूसुफ को बुलवाकर कहा यदि तेरा अनुग्रह तुझ पर हो तो अपना हाथ मेरी जंग के नीचे रखकर शपथ का की तू मेरे साथ कृपा और सच्चाई का यह काम करेगा कि मुझे मिस्र में मिट्टी ना देगा जब मैं अपने बाप दादों के संग सो जाऊंगा तब तू मुझे मिश्र से उठा ले जाकर उन्हें के कब्रिस्तान में रखेगा तब यूसुफ ने कहा मैं तेरे वचन के अनुसार करूंगा फिर उसने कहा मुझे शपथ का आता है उसनेउसे शपथ खाई तब इसराइल ने खत की सिरतेकी ओर सर झुका कर प्रार्थना की 

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