एक समय का बादशाह आज गुलाम होगा,
जिसे अपना कहा वही अनजान होगा।
जिस राह पर साथ चलने का वादा था,
उसी राह पर आज मैं अकेला परेशान होगा।
तेरी यादों का बोझ अब उठाया नहीं जाता,
दिल को इस तरह हर रोज़ सताया नहीं जाता।
तू चला गया है दूर इतना कि अब,
तेरे बिना एक पल भी बिताया नहीं जाता।
कभी तेरी हँसी में मेरी दुनिया बसती थी,
तेरी बातों में मेरी हर खुशी सजती थी।
आज वही बातें खामोशी बन गई हैं,
और मेरी ज़िंदगी बस एक सज़ा सी लगती है।
तूने कहा था साथ कभी नहीं छोड़ेंगे,
हर हाल में एक-दूजे का हाथ पकड़ेंगे।
आज उसी हाथ की गर्माहट को तरसता हूँ,
जिसे थामकर हम दुनिया से लड़ेंगे।
तेरे बिना ये रातें काटे नहीं कटती,
हर धड़कन में बस तेरी कमी सी लगती।
नींद भी अब आँखों से रूठ गई है,
और हर ख्वाब में तेरी तस्वीर ही दिखती।
कभी तू मेरी हर दुआ का हिस्सा था,
मेरी हर खुशी का एक किस्सा था।
आज दुआ भी अधूरी लगती है,
क्योंकि उसमें अब तेरा नाम नहीं होता।
दिल तो करता है तुझे फिर से बुला लूं,
बीते लम्हों को फिर से सजा लूं।
पर हकीकत की दीवार बहुत ऊँची है,
जिसे चाहकर भी मैं गिरा नहीं पाता।
तूने जो दर्द दिया है, वो
अब मेरा अपना है,
इसमें भी कहीं तेरा ही सपना है।
शायद यही मोहब्बत की सच्चाई है,
जहाँ हर खुशी के पीछे एक ग़म छुपा है।
लोग कहते हैं वक्त सब ठीक कर देता है,
हर जख्म को धीरे-धीरे भर देता है।
पर कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
जो हर गुजरते पल के साथ और गहरे हो जाते हैं।
अब तो बस इतना ही सीखा है जिंदगी से,
कि किसी को इतना भी मत चाहो दिल से,
कि उसके जाने के बाद,
तुम खुद से ही दूर हो जाओ।
अगर कभी लौट कर आओ तो पहचान ना पाओगे,
मैं वही रहूँगा पर मुस्कान ना पाओगे।
जो चमक थी कभी मेरी आँखों में,
वो अब आँसुओं के साये में छुप जाओगे।
ये कहानी अधूरी ही सही, पर
सच्ची है,
इसमें मोहब्बत कम और दर्द ज्यादा गहरा है।
तू खुश रहे कहीं भी, यही
दुआ है मेरी,
क्योंकि मेरी खुशी अब सिर्फ तेरी खुशी में ही ठहरा है।

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