माना कि मेरा एक ही दोस्त है। लेकिन
जिससे दोस्ती किया है
वह हजारों में एक है और वह है आप
पता नहीं कैसा रिश्ता है तुमसे
तुम्हें खुश देखकर दिल को सुकून मिलता
है----
तुम्हारी यादों में ही हर एहसास रहता है
तुम दूर होकर भी इतने करीब हो
की हर धड़कन में बस तुम्हारा नाम रहता
है
बुढ़ापे में भी तेरा चेहरा मुझे सबसे
हसीन लगेगा
उम्र चाहिए जितनी भी ढल जाए मेरा इश्क
तुझसे वही रहेगा
प्रेम में पड़े लोग एक ऐसे संसार की
तलाश करते हैं
जहां साथ बैठना अपराध न हो हाथ थाम लेना
अश्लीलता ना कहलाए
जहां दो पल का सुकून किसी भी प्रश्न
चिन्ह की छाया से मुक्त हो
जिसमें ना कोई शिकायत हो ना कोई शर्त हो
बस एक अटूट विश्वास और सम्मान हो
कभी उस इंसान को दर्द मत देना
जो तुम्हें दिल से चाहता हो
वरना एक दिन ऐसा होगा दिल होगा
लेकिन दिल से चाहने वाले नहीं--
इश्क वह नहीं जो तुम्हें मेरा कर दे
इश्क वह है जो तुझे किसी और का होने ना
दे
कितना चाहते हैं यह बताना जरूरी नहीं
तेरी खामोशी भी हमें मंजूर है
बस इतना जान लो मेरी जान
तेरे बिना यह दिल अधूरा है
तुम भी निकले सब की तरह
तुम्हें तो मानते थे रब की तरह
रिश्ता जताया नहीं जाता निभाया जाता है
फिर चाहे वह दूर हो या पास
जाने कब आंखों से इज़हार होगा
दिल में हमारे लिए प्यार होगा
कट रही है रात तेरी याद में
कभी तुझे भी इंतजार होगा
तुम रहते हो तो लफ्जों में बयां करें
तन्हाई के बाकी पन्नों का क्या करें
चांद तारों से रात जगमगने लगी
चमेली भी खुशबू महकने लगी
लगता है आपको आज हमारी याद आने लगी
तेरा हाथ थाम कर चलना चाहती हूं मैं
तुझे मनाना और तुझसे ही झगड़ना चाहती
हूं मैं
रिश्ता वही खूबसूरत होता है
जहां प्यार से ज्यादा भरोसा होता है
और हर परेशानी में एक आवाज आए फिक्र मत
करो मैं हूं ना
पलके झुका कर सलाम करते हैं हम
चाहे दिल से आपके लिए यह दुआ करते हैं
मैं तुझे एक दिन कम जीना चाहता हूं
ताकि मुझे कभी तुम्हारे बिना ना जीना
पड़े
सुख में तो हर कोई साथ निभाता है साहब
लेकिन सच्चा रिश्ता तो वह होता है जो
दुख में भी साथ निभाता है
तुम्हारे आने से जिंदगी में बहुत कुछ
बदल सा गया है
पहले जो हर लम्हा अधूरा था अब हर लम्हा
महक सा गया है--
जिसे छू के अच्छा लगे
वह अटैचमेंट है
जिसे सिर्फ देख कर भी अच्छा लगे वह
प्यार है
दिल और फूल बहुत खूबसूरत होते हैं
लेकिन कुछ लोग दिल और फूलों से भी
खूबसूरत होते हैं
ना चांद की चाहत ना सितारों की फरमाइश
मेरा और उसे चांद का मुकद्दर एक जैसा है
वह तारों में तन्हा मैं हजारों में
तन्हा
कैसे करूं मैं तुम्हारी यादों की गिनती
तुमसे इश्क किया था तो बेपनाह किया था
अब नफरत भी करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
यह प्यारा सा गुलाब आपके लिए
कबूल हो तो मुस्कुरा देना
ना हो तो हमें लौटा देना
रात की तनहाई में अब तो अक्सर
गुफ्तगू तेरी यादों से रहा करती है

कोई टिप्पणी नहीं: