sachi dosti kya hoti hai, sache dost ki pahchan

 जहां अहंकार है

वहां दोस्ती या प्यार नहीं हो सकता




गरीबी कभी भी मित्रता के आड़े नहीं आती

आड़े आता है तो बस इंसान का बड़ा हुआ अहंकार

 

सच्ची दोस्ती वही है जहां निभाने की चाह निस्वार्थ हो

रिश्तो से बड़ी चाहत और क्या होगी दोस्ती से बड़ी इबादत और क्या होगी

 

जब तक स्वार्थ जिंदा है तब तक दोस्ती केवल एक समझौता है

यह दोस्ती का गणित है सब यहां दो में से एक गया तो कुछ भी नहीं बचता

 

सुदामा का स्वाभिमान और कृष्ण का सम्मान

यही है एक आदर्श मित्र की पहचान

 


सच्चे दोस्त हीरे की तरह होते हैं

वह शानदार आकर्षक महंगे और अनमोल होते हैं

 

दोस्ती वह है जहां हंसी गूंजती है और यादें बनती हैं

हर नाव डूब सकती है लेकिन दोस्ती एक ऐसी नव है जो कभी नहीं डूबती

 

दोस्ती वह जीवंत धागे हैं जो कभी ना भूलने वाले पल बुनते हैं

ईश्वर भक्त के वश में है और मित्र प्रेम के वश में

 


सहानुभूति देना आसान है पर साथ निभाना मुश्किल

कृष्ण ने साथ निभाकर मित्रता को परिभाषित किया है

 

हम दोस्ती के ताजमहल नहीं बनाते

दिल से जो रिश्ता जोड़ा बस उसे मरते दम तक निभाते हैं

 

दोस्ती वह आइना है जिसमें हमारी बातें झलकती हैं

दिल से जो जुड़े वह यादें कभी नहीं मिटती

 

अपनी सफलता के शिखर पर पहुंच कर भी

पुराने संघर्ष के साथियों को कभी नहीं भूलना चाहिए

 

दोस्ती वह नहीं जो मौका मिलने पर साथ छोड़े

दोस्ती तो वह है जो मुश्किल वक्त में भी हौसला जोड़े

 


रिश्तों से बढ़कर होती है सच्ची दोस्ती की बात

दिल से निभाई जाए तो बन जाती है सौगात 

 

वक्त बदलता है परिस्थितियों बदलती हैं

पर सच्चा मित्र कभी अपना स्वभाव नहीं बदलते हैं

 

दोस्ती जीने का तरीका देती है दोस्त जीने का हौसला देता है

 

दोस्ती का रुतबा ऐसा की सर झुका नहीं सकती

यारी में कोई कमी हो तो खुद को माफ नहीं कर सकते

त्याग मित्रता की पहली और अंतिम शर्त है

 

दोस्ती है तो मुस्कुराहट है बिना दोस्ती के कोई न आहट है

 

जीवन में एक कृष्णा जरूर होना चाहिए जो सही राह दिखाएं

और खुद में एक सुदामा होना चाहिए जो अटूट विश्वास रखें

 

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