prabhu eshu masih vachan फिरौन की सपनों का अर्थ बताना

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फिरौन की सपनों का अर्थ बताना

पूरे 2 वर्ष बीतने पर फिरों ने यह स्वप्न देखा कि वह नील नदी के किनारे खड़ा है और उसे नदी में से  सुंदर और मोटी-मोटी गाय निकालकर कछार की घास चलने लगी और क्या देखा कि उनके पीछे और साथ गए जो कुरूप और दुर्बल हैं नदी से निकली और दूसरी गायों के निकटनदी के तट पर जो जा खड़ी हुईतब यह ग्रुप और दुर्बल गाय उन सात सुंदर और मोती-मोती गायों को खो गई तब फिरौन जाग उठा और वह फिर सो गया और दूसरा स्वप्न देखा किएक डंठल में से साथ मोती और अच्छी-अच्छी वाले निकाली और क्या देखा कि उनके पीछे साथ वाले पतली और पुरवाई से मुरझाई हुई निकली और इन पतली बलों ने उन 7 तो मोती और अन्य से भरी हुई बालों को निकाल लिया तब फिरौन जग और उसे मालूम हुआ कि यह स्वप्न ही था भर को फिरौन का मन व्याकुल हुआ और उसने मिश्र के सब विदेशियों और पंडितों को बुलावा भेजा और उनको अपने स्वप्न बताएं पर उनमें से कोई भी उनका फल फिरौन को ना बता सका

तब पिलानेहरो का प्रधान फिरौन से बोल उठा मेरे अपराध आज मुझे स्मरण आए जब फिरौन अपने दसों से क्रोधित हुआ था और मुझे और पकनेहारों के प्रधान को कैद कर की अंगरक्षकों की प्रधान की घर की बंदी गृह में डाल दिया था तब हम दोनों ने एक ही रात में अपने-अपने होना हर के अनुसार स्वप्न देखा वहां हमारे साथ एक एवरी जवान था जो अंगरक्षकों के प्रधान का दास था अतः हमने उसको बताया और उसने हमारे सपनों का फल हमसे कहा हम में से एक-एक के स्वप्न का फल उसने बता दिया और जैसा-जैसा फल उसने हमसे कहा था वैसा ही हुआ भी अर्थात मुझको तो मेरा पद फिर मिला पर वह फांसी पर लटकाया गया

तब फिरों ने यूसुफ को बुलावा भेजा और वह झटपट बंदी गिरे से बाहर निकल गया और बाल बनवाकर और वस्त्र बदलकर फिरौन के सामने आया फिरों ने यूसुफ से कहा मैंने एक स्वप्न देखा है और उसके फल का बताने वाला कोई भी नहीं और मैं तेरे विषय में सुना है कि तू स्वप्न सुनते ही उसका फल बता सकता है यह सूखने फिरौन से कहा मैं तो कुछ नहीं जानता परमेश्वर ही फिरौन के लिए शुभ वचन देगा फिर फिरौन युसूफ से कहने लगा मैंने अपने स्वप्न में देखा कि मैं नील नदी के किनारे खड़ा हूं फिर क्या देखा की नदी में से साथ मोती और सुंदर-अंदर गए निकालकर कछार की घास चढ़ने लगी फिर क्या देखा कि उनके पीछे साथ और गए निकली जो दुबली पतली और बहुत कुरूप और दुर्बल हैं मैंने सारी मिस्र देश में ऐसी कुदाल गए कभी नहीं देखी इन दुर्बल और कुंडोल गायों ने उन पहले साथ मोती-मोती गायों को खा लिया और जब भी उनको खा गई तब यह मालूम नहींहोता था कि वह उनको खा गई है क्योंकि वह पहले के सामान जैसे की तैसी कुंडोल रही तब मैं जाग उठा फिर मैं दूसरा स्वप्न देखा कि एक ही डंठल में साथ अच्छी-अच्छी और उन से भरी हुई वाले निकली फिर क्या देखता हूं कि उनके पीछे और साथ वाले और पतली और पुरवाई से मुरझाई हुई निकली और इन पतली बलों ने उन साथ अच्छी-अच्छी बालों को निगल लियाइसे मैं ज्योतिषियों को बताया पर इसका समझनेहरा कोई नहीं मिला

तब यह सूखने फिरौन से कहा फिरौन का सपना एक ही है परमेश्वर जो काम करना चाहता है उसको उसने फिरौन पर प्रगट किया है वह साथ अच्छी-अच्छी गाय 7 वर्ष हैऔर वह साथ अच्छी-अच्छी वाले भी 7 वर्ष हैंस्वप्न एक ही है फिर उनके पीछे जो दुर्बल और गुडुल गए निकाली और जो साथ सूची सूची और पुरवाई से मुरझाई हुई वाले निकली वह काल के साथ वर्ष होंगे यह वही बात है जो मैं फिरौन से कह चुका हूं कि परमेश्वर जो काम करना चाहता है उसे उसने फिरौन को दिखाया है सुन सारे मिस्र देश में 7 वर्ष तो होता याद की उपज के होंगे उनके पक्ष 7 वर्ष काल के आएंगे और सारे मिस्र देश में लोग इस सारी उपज को भूल जाएंगे और काल सेदेश का नाश होगा और सुखल बहुतायत की उपज देश में फिर स्मरण ना रहेगा क्योंकि काल अत्यंत भयंकर होगा और फिरों ने जो यह स्वप्न दो बार देखा है इसका भेद यही है कि यह बात परमेश्वर की ओर से नियुक्त हो चुकी है और परमेश्वर इसे शीघ्र ही पूरा करेगा इसलिए अब फिरौन किसी समझदार और बुद्धिमान पुरुष को ढूंढ कर के उसे मिस्र देश पर प्रधानमंत्री थायराइड फिरौन यह करें कि देश पर अधिकारियों को नियुक्त करें और जब तक शुक्ला के साथ वर्ष रहे तब तक वह मिश्रा देश की उपज का पंचमस लिया करें और वह इन अच्छे वर्षों में सब प्रकार की भजन वस्तु इकट्ठा करें और नगर नगर में भंडार घर भोजन के लिए फिरौन के वश में करके उसकी रक्षा करें वह भोजन वस्तु काल के उन सात वर्षों के लिए जो मिश्र देश देश में आएंगे देश के भजन के लिए राखी रहे जिस देश का उसे काल से सत्यानाश ना हो जाए

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