अंगारों पर चलकर भी जो शीतलता बिखर दे

 

सनातन धर्म सनातन विचारधारा सिखाती है


शास्त्रों से बुद्धि तेज और शास्त्रों से भुज में दम है

हम सनातनी किसी से ना पहले काम थे और ना अब काम है

 

सनातन धर्म

हाथों में माल भी है और जरूरत पड़े तो भला भी है

सनातनी संस्कृति ने हमें हर रूप में पल भी है

 

सनातन संस्कृति में रुद्राक्ष केवल आभूषण नहीं

बल्कि भगवान शिव की कृपा का प्रतीक माना गया है

सही विधि से धारण किया गया रुद्राक्ष मानसिक शांति आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है

 

विनम्रता हमारा गहना है पर स्वाभिमान हमारी जान है

सनातनी होना ही इस जग में मेरी सबसे बड़ी पहचान है

 

सनातन धर्म में आरती भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है

दीपक जलाकर उसे भगवान के सामने घुमाया जाता है

अंत में लव का आशीर्वाद माथे पर लिया जाता है

 

मृत्यु को जो आभूषण माने वह शिव का अनुयाई है

सनातन की डगर पर चलना ही सबसे बड़ी कमाई है

 

सनातन का अर्थ है जो सदा बना रहे शाश्वत और धर्म का अर्थ है कर्तव्य या नियम

यह ईश्वरआत्मा और मोक्ष की शाश्वत प्रकृति को मानता है

 

मिट्टी का चोला बदल जाएगा पर आत्मा वही पुरानी है

सनातन कोई धर्म नहीं यह तो जीवन की अमर कहानी है

 

अंगारों पर चलकर भी जो शीतलता बिखर दे

वही सनातनी है जो वक्त की धारा फेर दे

 

पूर्णिमा को सनातनपरंपरा में मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का दिन माना जाता है

इस दिन ध्यान प्रार्थना चंद्र दर्शन और सात्विक भोजन करने से मां और शरीर में संतुलन बना रहता है

 

भीड़ का हिस्सा बनना तो कायरो का काम है

सनातनी वही है जिनके रोम-रोम में राम है 

 

सनातन विचारधारा सिखाती है

की जीवन केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं बल्कि आत्मज्ञान सेवा और सदाचार की लिए है यह प्रकृति मानवता और धर्म की संतुलन के साथ प्रेम सहिष्णुता और कर्तव्य पालन का मार्ग दिखाती है 

 

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